वासनम ​Scene No. 2

Scene No.2

Location : Well Furnishad House / Hall

Effect : Early Morning

Character : Saloni

( लड़की की आंखे खुलती हैं। उसके सामने एक बड़ा सा तांबे का घड़ा रखा हुआ हैं जिसमे दूध, पानी ,हल्दी, गुलाब के पत्ते, गेंदे के फूल दिख रहे हैं। वह लड़की उस तांबे के घड़े से एक लोटा मिश्रित जल भरकर अपने सीने पर लाकर कहती है, )

सलोनी : मैं सलोनी हूँ…मैं पापी हूं….मैं अपवित्र हूँ….अपनी अपवित्रता का कारण भी मैं ही हूँ । मैं अपने पापों का प्रायश्चित करूंगी। इसलिए आज मैं अपने आपको शुद्ध करूंगी।
( सलोनी लोटे का जल अपने सिर पर डालती हैं। दूध फूल मिश्रित जल उसके सिर से झरने लगता है, उसके काले चमकीले रेशम केश से गुजरते हुए उसकी आँखों के बरौनियों को तर करते हुए, उसके गुलाबी होठों को भिगोते हिये उसके स्तन से होते हुए नीचे कमर की तरफ जल ऐसे गिर रहा है मानो कोई हिमालय पिघल रहा हैं। ये सारे लांग, मिड और क्लोज अप शॉट्स राउंड ट्राली पर घुमाते हुए लड़की के भीगे बदन को दिखाएंगे )
(   Background में जोर जोर से स्त्री पुरुष मिश्रित स्वर चल रहा हैं जो शुद्धिकरण मन्त्र हैं । ) 
अकामत: कृतं पापम वेदाभ्यासेन शुध्यति।

कामतस्तु कृतं मोहात प्रयश्चिते: पृथग्विधे:।।

उपपताक़शुद्धि: स्यादेवं चंद्रायनेंन वा।

पयसा वापि मासेन पराकेणाथ वा पुनः ।।

( सलोनी एक एक लोटा पानी अपने सिर पर डाल रही हैं। और एक एक लोटे के पानी के साथ आउट फोकस में कहानी फ्लैश बैक में चलना शुरू हो जाती हैं । ) 
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