वासनम : Scene No. 5

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Scene No. 5

Flash Back + Present

Location : Kid Room
Effect : Morning
Characters : 4 year old Saloni & Mother

( Saloni’s sound overlap as per scene. Scene should be shoot according to voice overlap of Saloni.This sc. may be in intercut format. )

सलोनी V/O : और माँओं की तरह मेरी माँ भी मुझे नहला धुलाकर खूब सजाती सँवारती थी। मेरे सिर पर चमेली के तेल लगाकर छोटी छोटी दो चोटियां बांध दिया करती थी। चेहरे पर खूब पाउडर मल कर मुझे और गोरी चिट्टी बना देती थी। मेरी नन्ही नन्ही आंखों में यो मोटी मोटी काजल की लकीर खींच दिया करती थी और  उसके उंगलियों में बची खुची थोड़ी सी काजल से मेरे सिर के दाहिने तरफ कोने पर एक बिंदी लगा दिया करती थी ताकि किसी की मुझे बुरी नज़र न लगे। बार्बी डॉल वाली फ्रॉक पहना कर मुझे आसमान में झुलाते हुए कहती थी,

 

माँ : मेरी बिटिया चंदा रानी

मुखड़ा जैसे चांद का टुकड़ा
V/ O : बस यही से सारी प्रॉब्लम हम         लड़कियों के साथ शुरू हो जाती हैं। हम लड़कियों को बचपन से ही चांद बना दिया जाता हैं और सारी जिंदगी लोग हमें घूर घूर कर देखते हैं। हमें देखकर लड़कों को, जवानों को, बुड्ढों के आंखों में ठंडक पहुँचती हैं। उनके कलेजे में एक मीठी सी हूक मचलती हैं। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि बेटी को चांद की तरह न बनाओ की हर कोई घूर घूर कर देखे बल्कि बेटी को सूरज की तरह बनाओं की घूरने के पहले ही नज़र झुक जाए या आंखे चुधियाँ जाए।
Cut to****

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