Audition Script 1

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AUDITION  SCRIPT
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Dialogue of
1) Judge
2) Deffence Lawyer
3) Prosecution Lawyer
4) Rape Victim Girl
Vasnam court scene ( audition script)
Judge:
क्या तुम सचमुच में इतनी भोली हो या तुम्हारी बुद्धि इतनी विकसित नही हुई हैं कि तुम अपना अच्छा बुरा समझ सको ।।। या तुम्हारे माँ बाप ने तुम्हे इतना कमजोर बनाया है की थोड़े से डिप्रेशन में कोई बन्दा तुम्हारे साथ प्यार के दो बोल बोल कर तुम्हे बिस्तर पर ले जाता है और तुम बिस्तर पर चली जाती हो। वो तुम्हारे पूरे होशो हवाश में तुम्हारे कपड़े उतारता है और तुम नंगी होने के लिए तैयार हो जाती हो ? क्या उस वक़्त तुम्हे नहीं लगता कि ये तुम्हारा यौन शोषण हो रहा हैं जो तुम्हे अब कोर्ट में इंसाफ मांगने की जरूरत आ पड़ी की तुम्हारे साथ दुष्कर्म हुआ हैं ।ऐसा क्यों ??? I cant understand
Deffence Lawyer : 
न्यायाधीश महोदय, सलोनी इतनी बेवकूफ नहीं है की एक दिन कोई इनकी जिन्दगी में आता हैं, एक बार नही सैकड़ों बार इनके साथ इनकी सहमती से सम्भोग करता हैं ,वो भी एक दो दस बीस दिन नही बल्कि कई सालों तक इनसे शारीरिक सम्बन्ध बनाता है वो भी इनकी सहमती से। सम्भोग के दौरान या उसके पहले या उसके बाद में इनका सेक्स पार्टनर इनसे हवाई वादा करता हैं वो भी एक बार नहीं जितनी बार इन्हें जन्नत की सैर करा रहा था उतनी बार इन्हें चाँद तारे तोड़ कर देने का वादा करता हैं और ये मिस सलोनी…………….शायद मिसेज सलोनी,,,,,,,,……….दूध पीती बच्ची की तरह विश्वास करती गई और आज सैकड़ों बार के सम्भोग के बाद, कई वर्षों के मोहब्बत के खुमार उतरने के बाद आज जब इनकी आँखे खुली तब इन्हें पता चला की भाई इनके साथ rape हो गया। जज साहिबा आप मुझे बताएं की ये कैसा rape है जिसमे विक्टिम को एक बार में नहीं सैकड़ों एहसास के बाद एहसास होता है की ओह माय गॉड मेरे साथ तो rape हो गया |
 Judge : 
rape और gang rape तो कानून की समझ में आता है लेकिन ये कैसा rape हैं जिसमे लडकियाँ सालोंसाल सहमती से सम्भोग करती हैं और एक दिन कोर्ट में आकर कहती हैं की मेरे साथ rape हो गया।  its a mutual rape beyond rape & gang rape where our young girls are more responsible.
 Deffence lawyer : 
जज साहेब, मैं अभी जो कहने जा रहा हूँ उसका इस केस से सीधा कोई लेना देना नहीं है लेकिन ऐसे केसेस में इनका बहुत दूर का रिश्ता होता हैं  या यूँ कहें की आप इसे एक बार के लिए भले ही नज़रंदाज़ कर दे लेकिन पूरी तरह से इंकार या नकार नहीं सकते। आज कल 99% लड़कियां अपना चेहरा ढंक कर चलती हैं।दुपट्टे या स्कार्फ से मुंह को लपेटकर चलती है भले ही सीना खुला हो।।। उनसे पूछो तो कारण बताती है कि बहुत पॉल्युशन है, sun rays से स्किन बर्न हो जाएगी। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हैं। कोरी बकवास करती हैं ये लड़कियां क्यों कि दुपट्टे से चेहरा ढंकने के पीछे सच्चाई ये है कि बाइक की ऊंची बैक सीट पर बैठ कर बॉयफ्रेंड से चिपक कर बात करने में, क़िस्सी करने में अपनी पहचान को छुपाने में आसानी हो। इस दुप्पटे की आड़ में छिपकर अपनी हवस का खेल खेलने में आसानी हो। ये दुपट्टा कभी लाज की आड़ हुआ करता था लेकिन अब ये निर्लज्जता को छुपाने के काम आने लगा हैं। पॉल्युशन और कल्चर बर्न तो इन लड़कियों के अंदर भरा हुआ हैं। दुपट्टे की असली जगह सिर को ढंकने की ओढ़नी और सीने की लाज को छुपाने की हया में होती है ना कि मुँहबको दुपट्टे में लपेटकर पार्क, बीच, थर्ड ग्रेड चददर बदल होटल में छुपकर अपने बॉयफ्रेंड के साथ जाने के लिए किया जाता है ताकि लोग आपकी झूठी शराफत के दर्शन न कर सके। अगर ये दुपट्टा अपनी सही जगह पर आ जाये तो लोगों को rape का इनविटेशन भी मिलना बंद हो जाएगा।
 Prosecution Lawyer : 
बलात्कार के एक आरोपी को बचाने के लिए, समाज की गंदगी साफ़ करने की जगह deffence लॉयर सत्यव्रत सत्यार्थी जी एक लडकी की इज्जत को rape के बाद और भी तार तार करने के लिए ओछी और बहुत ही मामूली तर्कों का सहारा ले रहें हैं। दुपट्टा अगर हम लडकियों ने उतार फेका हैं तो उसके भी जिम्मेदार तुम्हारा पुरुष समाज हैं। माननीय जज साहिबा, अगर प्यार करके सलोनी ने गलती की है तो सलोनी के  प्यार का मजाक बना कर कुलदीप ने भी गलती की है। तो इस गलती की तोहमत सिर्फ सलोनी पर ही क्यों ?
माना की अगर सलोनी ने गलती की हैं तो सलोनी का तन मन लुटकर कुलदीप ने सलोनी के गलतियों की सजा दे दी तो तो जज साहिबा किसी के दिल को दुखाना किसी के जज्बात के साथ खेलना किसी नारी के देह का उसके यौन का शोषण करना भी तो अपराध है भले ही यह शोषण प्यार के मुलम्मे में चढ़ाकर लडकी की सहमती से किया गया हो तो इस गलती की भी सजा ………..मेरा आपसे अनुरोध है की बलात्कार के इस आरोपी कुलदीप को भी उसकी गलती की कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए। आपके इन्साफ से समाज में एक नया संदेश जायेगा।
Deffence Lawyer : 
Melord, आप बड़े गौर से मेरी बात सुने। मैं चाहुगा की पीडिता की वकील भी मेरी बात से सहमत होगी तो हिंदुस्तान की अदालतों में बलात्कार के केसेस में बहुत कमी आएगी। पहले rape हुआ करते थे। फिर gang rape होने लगे अब लडकियाँ ये आरोप लगाने लगी की उनके साथ एक ही व्यक्ति ने 16 बार 28 बार 40 बार या सैकड़ों बार rape किया । ये कैसा rape हैं ? rape gangrape के बाद अब इसको क्या regular rape का नाम दें। अगर इस देश में घूष लेना और देना दोनों अपराध हैं तो सहमती से म्यूच्यूअल अंडरस्टैंडिंग से सेक्स के बाद लडकी वादा खिलाफी का आरोप लगाकर लडके को rape का आरोपी बनाती है तो लडकी को भी पीडिता या विक्टिम न कहकर उसे भी rape का आरोपी बनाना चाहिए क्यों की सम्भोग के दोरान केवल लडके ने ही नही लडकी ने भी सम्भोग का आनंद लिया था। अगर ये डर लडकियों के मन में बैठ जाये तो इस देश में कई बार कई साल बाद लगने वाले rape के आरोपों में 99% कमी आएगी । हम जिस तरह से अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कंडोम का विज्ञापन करते हैं वैसे ही हमें इस कानून का भी विज्ञापन जोर शोर से चलाना चाहिए। (lawyer chandrika की तरफ देखकर) am i right or wrong ?   कोर्ट में सन्नाटा छा जाता हैं।
Prosecution Lawyer : 
मेरे काबिल वकील दोस्त,आप ये न भूले की according to delhi high court verdict,
Sex on false promise of marriage is rape
Deffence lawyer : 
मेरे काबिल वकील दोस्त, आप डेल्ही हाई कोर्ट का वर्डिक्ट तो याद रखते है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के उस वर्डिक्ट को क्यो भूल जाते है कि प्रेम सम्बन्ध के दौरान किया गया शारीरिक सम्बन्ध rape नही होता।     एक बात को मैं बड़ी शिद्दत के साथ अदालत के सामने रखना चाहता हूँ की जब एक लड़का किसी लडकी से शादी का वादा करके सेक्स करता है तो लडकी ये क्यों नही सोचती की लड़का अपना वादा तोड़ भी सकता है । लडकी चाहे पढ़ी लिखी हो या अनपढ़ वो ये क्यों नहीं सोचती की   क्या गारंटी है की लड़का सेक्स के पहले या सेक्स के दौरान प्रेम या भाव में आकर किया हुआ अपना वादा पूरा करेगा । इसका मतलब लडकी भविष्य में होने वाले एक गुनाह की पीडिता बन रही है और भविष्य के एक आरोपी के साथ अपने सम्बन्ध बना रही है जिसमे 99% धोखा होने के चांसेस है । क्या ये लडकियाँ  जानबुझ कर किसी को गुनाह के लिए नहीं उकसा रही हैं।
Should sex before marriage be termed as rape ?
जबरन किसी लडकी के साथ उसकी इच्छा के विरूद्ध सेक्स किया जाये तो rape कहलाता है । अगर सहमती से एक लड़का लडकी सेक्स करते हैं तो ये rape नहीं होता। बाद में उन दोनों के बीच किसी बात को लेकर अनबन हो जाये और लडकी बदला लेने के उद्देश्य से या मानहानि के उद्देश्य से लडके पर बलात्कार का आरोप लगाती हैं तो ये कहाँ तक जायज हैं। अगर ये गुनाह है तो सिर्फ लड़का ही जिम्मेदार क्यों ? लडकी भी जिम्मेदार होनी चाहिए क्यों की उसकी सहमती से सेक्स हुआ था । लेकिन शायद औरतों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले लोग इसे गलत तर्क समजे तो क्या ये बेहतर उपाय नहीं हो सकता की शादी के पहले बनाये जाने वाले सम्बन्ध या तो rape हो या तो कानून के दायरे में उनकी कोई अहमियत न हो । जैसे सिगरेट या शराब पिने से स्वाथ्य पर बुरा असर पड़ता है ये पढकर भी लोग अपने रिस्क पर शराब सिगरेट पिते है और अपनी लापरवाही की मौत मरते है वैसे ही सेक्स के बारे में भी statutory वार्निंग होनी चाहिए. मैं हिंदुस्तान के सभी समजदार लोगो की राय जानना चाहता हूँ की ऐसा करना उचित होगा या नहीं ??
Saloni ( Rape Victim ) :
मैं  बलात्कार  की शिकार हूँ । मैंने अपने साथ हुए शारीरिक शोषण के लिए कुलदीप पर बलात्कार के आरोप लगाये थे वो इसलिए की मुझे इन्साफ मिले। वो इसलिए नहीं की इस तरह की जूठी सनसनीखेज पब्लिसिटी स्टंट करके BIGG BOSS में CONTESTANT बनकर न मुझे 1 करोड़ कमाने की तमन्ना थी और न ही मुझे किसी को ब्लैक मेल करके अपनी डीलक्स लाइफ सेट करनी थी। लेकिन हुआ क्या ? मेरे साथ इन्साफ होना तो दूर उल्टा मुझ पर बहुत सारे घिनौने आरोप इतनी आसानी से लगा दिए गये की मुझे इसकी सफाई देने में कई जन्म लग जायेंगे क्यों की मैं लडकी हूँ।……………………....हाँ, सिर्फ इसलिए की मैं एक लडकी हु। कोई मेरे साथ दोस्ती करें, दुश्मनी करें, सहानुभूति दिखाएँ, प्यार के दो शब्द बोलकर या आसमान से मेरे लिए तारे तोडकर लाने के वादें करे, मॉल की शौपिंग से लेकर मल्टीप्लेक्स में फिल्म दिखाएँ, तमाम खुबसुरत हीरोइन के मुकाबले मेरी ज्यादा तारीफ करें, किसी न किसी तरह अपनापन दिखाएँ, इन सबके पीछे  सिर्फ एक ही मकसद होता हैं…………………….और वो हैं किसी न किसी तरह से मुझे बिस्तर पर ले जाने की……….मेरी सहमती से या मेरी मर्जी के खिलाफ मुझे मजबूर करके…………………उस बिस्तर पर लेटने के बाद……………मेरे कपड़े उतारकर मुझे नंगा करने के बाद भी………………मैं ही दोषी हूँ क्यों की मैं लडकी हूँ। अपनी इज्जत अपनी virginity बचा कर रखने की जिम्मेदारी सिर्फ मेरी है। सिर्फ मेरी क्यों की ये मेरी निजी प्रॉपर्टी हैं लेकिन इस पर नजर सबकी बराबर लगी रहती हैं।   बचपन में स्कूल के मास्टर जी मेरी पीठ मेरे गाल को छुप छुप कर लोगों से नजरे बचाकर सहलाते थे मेरी चुम्मियां लेते थे तो मैं ही जिम्मेदार थी क्यों की तब मुझे उनकी भावनाओं से अज्ञान थी। तब भी मास्टर जी गलत नही थे क्योंकि दोष मेरा था क्यों की मैं लड़की हु।   थोड़ी बड़ी हुई तो राह चलते कोई मनचला छेड़खानी करता……गंदे गंदे इशारे करता…….. बस में चढ़ते समय कोई अंकल जान बुझ कर मेरे छाती पर कुहनी मारकर सॉरी बोलते…….ट्रेन में भीड़ में अनजाना आवारा लड़का मेरी कमर के निचे चिकोटी काटता………कोई भी ……..कभी भी ……मौका देखकर मेरे बॉडी के किसी भी पार्ट को या यहाँ तक की मेरे प्राइवेट पार्ट को छूने की कोशिश करता या छू भी लेता तो मैं चाह कर भी उसका मूह नही नोच सकती थी क्यों की अगर मैं कुछ बोलती तो इज्जत मेरी जाती…….बदनाम मैं होती क्योंकि मैं लड़की हु……………….जब की मैं उसके गंदे भावना को अच्छी तरह समझती थी लेकिन मैं कमजोर अबला होने के नाते इतनी लाचार थी की मुझे अपनी लडकी होने पर तरस आता था । कॉलेज के दिनों में कोई लड़का पता नहीं क्यों दिल को अच्छा लगने लगा और इसके पहले की मैं कुछ समझ पाती की उसने कब मेरी मुहब्बत में चाँद तारे तोड़ कर लाने का वादा करते करते कब वो मेरी सील तोड़ गया मुझे पता होने के बावजूद भी मैं अज्ञान बनी रही क्यों की मैं लडकी हूँ जो इतनी कमजोर हैं की अपना कौमार्य अपनी VIRGINITY भी नहीं सम्भाल पाई और उस लडके का मैं कुछ भी बिगाड़ नहीं पाई जब मैंने उसे अपने दोस्तों के बीच मेरी सील तोड़ने की बहादुरी का जिक्र करते हुए सुना। कॉलेज में मुंह छिपाकर नजर नीचे करके लोगों की फब्तियां सुनने को मैं मजबूर थी क्यों की मैं लडकी हूँ…………. लाचार हूँ …………… कमजोर हूँ ……………. …….और अपने परिवार समाज के आबरू की ठेकेदार हूँ। ये मेरी एकतरफा जिम्मेदारी है की मैं अपने आपको समाज के भेदियों से बचाकर रखु क्योंकि लडकी होना मेरी मजबूरी हैं।  नौकरी की तलाश हो या कोई अरमान हो शादी का वादा हो या मुहब्बत का झांसा हो हर कोई फाइनल डील बिस्तर पर ही करना चाहता हैं जहा जाने अनजाने में हम लडकियाँ अक्सर बहुत कच्चे साबित होते है और बिज़नस डील में LOSS होने के बाद उसकी भरपाई के लिए हम इन्साफ के मन्दिर में इस कोर्ट में आते हैं तो एक एक करके पुलिस लॉयर मीडिया इंसाफ देने के नाम पर हमारे इज्जत की धज्जियां उड़ाते है हमारी आत्मा को तार तार करते हैं और हम ये सब झेलने को मजबूर हैं क्यों हम लडकी है और भगवान ने हम लडकियों को पैदाइशी कमजोर बनाता हैं । और मुश्किल से मुश्किल  लम्हा में टूट कर चूर चूर होकर बिखर जाने की वसीयत हमें परिवार से मिलती हैं क्यों की…
स्त्री हार कर खुश होती है, पुरुष जीत कर  खुश होता हैं। पुरुष हारना नहीं चाहता और स्त्री जान बुझ कर जीतना नहीं चाहती। अगर पुरुष हारता भी है तो वह हार मानता नहीं है । लेकिन स्त्री जीत भी जाये तो वह आसानी से हार मान लेती है । एक पुरुष दुनिया की सारी स्त्रियों के साथ सोना चाहता हैं और स्त्री किसी एक पुरुष से दुनिया के सारे पुरुषों की संतुष्टि चाहता हैं। स्त्री के पास सेक्स के 16 पॉइंट होते हैं और पुरुष के पास सेक्स का सिर्फ एक पॉइंट होता हैं। स्त्री के 16 सेक्स पॉइंट संतुष्ट न होने के बावजूद भी वो शांत रहती है लेकिन पुरुष अपने 1 सेक्स पॉइंट को शांत करने के लिए सारे नियम कानून संयम मर्यादा लाज शर्म छोड़ देता हैं। जरूरत पडती है तो वहशी जानवर बनने में भी देर नहीं लगती। क्या पुरुष देह पत्थर है जो नारी देह को कुचलने या मसलने के लिए ही बना हैं ? क्या नारी देह पत्थर नहीं बन सकती जो पुरुष देह से टक्कर लेकर चिंगारी पैदा कर सकें ???
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