If you want to be an actor ………..

9
68

Nawazuddin Siddiqui का जन्म एक मुसलमान खानदान में हुआ था 19 मई 1974 को ‘बुधाना’ में हुआ था,जो कि उत्तरप्रदेश के मुजफ्फर नगर जिले में है। उनके पिताजी किसानी करते थे। एक बडा सा घर था जिसमे करीब पच्चास लोग रहते थे। वो अपने आठ भाई-बहनो में सबसे बड़े थे। नवाज़ एक शर्मीले व्यहवार के लड़के थे। और हमेशा वो अपने आप को कमजोर समझते थे। और वो गर्मियों के छुट्टी में अपने मुँहबोले भाई के मेडिकल स्टोर में जाकर काम करते। उन्होंने अपनी पढ़ाई हिंदी मध्यम से की फिर उन्होंने अपना ग्रेजुएशन बी.एस.सी (केमिस्ट्री) में गुरुकुल कंगरी विश्वविद्यालय से किया। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद काम के सिलसिले में नवाज वडोदरा आये , और वहा पर उन्होंने एक साल तक केमिस्ट का जॉब किया। फिर एक दिन उनके मित्र ने उन्हें एक गुजराती प्ले दिखाने ले गए। और फिर नवाज़ ने फैसला कर लिया कि अब वो प्ले करेंगे। फिर वो वडोदरा में ही गुजराती प्ले करनेे लग गए।

nawazuddin siddiqui
Pic credit : nawazuddinsiddiqui.com

उन्हें लोगो ने कहा यहा कुछ फायदा नही, जाओ (एन.एस.डी) के लिए कोशिश करो। एन.एस.डी जाने से पहले उन्होंने 1992 में भारतीय नाट्य अकादमी (बी . एन . ए) पास आउट हुए। फिर उन्होंने 1996 में ( एन.एस.डी) पास आउट किया। और फिर चार साल तक उन्होंने दिल्ली में स्ट्रीट प्ले किया। इस दौरान वो दिल्ली के लक्ष्मी नगर के एक छोटे से कस्बे में तीन-चार लोगों के साथ मिलकर रहते थे। स्ट्रीट प्ले से ज्यादा पैसे नही मिल पाते थे, फिर उन्होंने ने सोचा यहा बहुत बुरी हालत हो रही है,इससे अच्छा मुम्बई जाकर बुरी हालत होए। और उनका कोई सपना नही था कि वो कोई स्टार बन जाए या बड़े पर्दे पर दिखे, बस वो चाहते थे कि किसी तरह सर्वाइव करते रहे। फिर 2000 में उन्होंने अपना कदम मुम्बई में रखा। और नवाज़ को खाली बैठने से बड़ा डर लगता था, वो हमेशा काम करना चाहते भले काम छोटा ही हो। मुम्बई में वो वांदाई कॉलोनी में रहने लगे, बहुत छोटे से कमरे में रहते थे,एक कमरे में चार लोग रहते थे। इतना छोटा कमरा  रहता था कि अगर दरवाजा कोई खोलता था, तो दूसरे के पैर में लग जाता था। आसपास बहुत सारे एक्टर रहते थे, कही छोटा काम मिलता था तो कर लेते थे, और नवाज़ कहते है कि अगर काम नही मिलता था तो एक चीज़ बहुत अच्छा था कि किसी से उधार ले लेते थे, और वहा पर लोग एक दूसरे की मदत करते थे। फिर नवाज़ ने टीवी में काम ढूढ़ना शुरू किया, और फिर उन्होंने पहली बार काम किया एक एपिसोडिक “एक हकीकत” में। फिर वो भी बंद हो गया , और धीरे धीरे नवाज़ को टीवी में काम मिलना बंद हो गया। कही काम मांगने जाते तो लोग कहते ” अरे यार तुमको लेंगे तो एक्स्ट्रा बेबी लाइट लगानी पड़ेगी , और शाम को एपिसोड भेजना है, तुम्हारे लिए मेकअप करना पड़ेगा। ये सब सुनकर नवाज़ को बुरा लगता, और बहुत गुस्सा आता था। और फिर शाम को सब स्ट्रगलिंग एक्टर्स आदर्श नगर में मिलते थे, और जिस किसी के पास काम होता था, वो दारू पिलाता था, फिर सब अपनी भड़ास उतारते थे। फिर बहुत दिन के स्ट्रगल के बाद एक दिन नवाज़ के दोस्त को सरफरोश फिल्म में एक छोटा सा रोल मिला लेकिन वो कही और बिजी हो गया , तो उसने नवाज़ को बोला जाके तू ऑaudition देदे। नवाज़ को उस फिल्म में सिर्फ चालीस सेकंड का रोल मिला जो कि एक क्रिमिनल को रोना था , और इतना दिन से काम मिला नही था , उस frustation की वजह से नवाज़ ने काम को बहुत ही बेहतरीन तरीक़े से किया, यहा तक कि आमिर खान ने नवाज़ की खूब सराहना की। उस समय 2500 रुपये मिले थे, जोकि बहुत बड़ा रकम था, फिर शाम को अड्डे पे सब मिले और खा-पीकर सब पैसा खत्म हो गया। फिर अगले दिन से पैदल चलना शुरू , कही छोटा मोटा काम मिल जाता , नवाज़ कहते है कि उन्होंने कई सी ग्रेड फिल्मे की है। कभी खयाल आता की कुछ सही हो नही रहा है, कभी वापस घर लौट जाने का खयाल आता,फिर सोचने लगते की सब गांव वाले बोलेंगे की फिर आ गया , घर वाले अलग ताना मारेंगे की चेहरा देखा है ? फिर नवाज़ को अनुराग कश्यप की फिल्म ब्लैक फ्राइडे मिली , उस से थोड़ा था कि कुछ हो जायेगा , लेकिन फिल्म बैन हो गयी , फिल्म में काम करने वाले सभी एक्टरों का चेहरा उतर गया। और जब फिल्म  रिलीज   हुई तो उसके पहले ही लीक हो चुकी थी। फिर नवाज़ ने सोच लिया कि उनके नसीब में ही ऐसा है , उनके साथ कभी अच्छा नही हो सकता। कई बार तो ऐसा हुआ कि कल शूट है , और रात को फोन  आता कि किसी और एक्टर को ले लिया गया है , कई फिल्मों में लीड रोल किया तो वो फिल्मे ही रिलीज नही हुई। फिर एक समय ऐसा आया कि नवाज़ अपने आप को बहुत कमजोर महसूस करने लगने , किसी का उधार नही चुकाया था , तो लोगो ने पैसा भी देना बंद कर दिया था, फिर वो दिन भर घर के बाहर सड़क पर घूमते थे , वो सारी चीज़ें देख रहे थे  । नवाज़ को ऐसा लगने लगा था कि वो कुछ दिनों में मर जायेंगे , क्योंकि उनके आसपास यही हो रहा था , उनके सामने उनका एन.एस.डी का दोस्त टी.बी से मार गया , एक दोस्त मेंटली डिस्टर्ब हो गया , यह सब देख के नवाज़ को लग रहा था कि वो कुछ ही दिनों के मेहमान है, दो साल तक ऐसा चलता रहा। और यह हो गया था कि अब लौट के तो जा नही सकते, जो करना है यही करना है ” जीना यहा मरना यहा इसके सिवा जाना कहा”  | फिर एक फिल्म मिली “मिस लवली” जोकि परेश रावल ने रिकमेंड की थी। फिल्म रिलीज  हुई और उस फिल्म को कई अवार्ड्स मिले। और उसके तुरंत बाद 2011 में फिल्म मिली “गैंग्स ऑफ वासेपुर” और जब फिल्म  रिलीज हुई  तो उसके अगले ही दिन नवाज़ के पास 200 स्क्रिप्ट आयी। और फिर नावज़ आगे बढ़ते गए, और आज तक पीछे मुड़ कर नही देखे। और वो नए एक्टरों के लिए एक आइडल बन चुके है।

Source : anupam kher’s people (Republic Tv)

https://youtu.be/jZI3ePvb1Vk

9 COMMENTS

  1. Hi sir I’m salim and I wanna become as an lead actor in the film industry and i need your help actually i wanna know that how the script is in the film. And my number is 7990122056

  2. I know this if off topic but I’m looking into starting my own blog and was curious what all is required to get set up? I’m assuming having a blog like yours would cost a pretty penny? I’m not very web savvy so I’m not 100 positive. Any recommendations or advice would be greatly appreciated. Thanks bfkegedadfdc

  3. Hi there, I found your site by way of Google while searching for a comparable matter, your web site got here up, it looks good. I have bookmarked it in my google bookmarks. cfebbffdbbck

  4. I just like the helpful information you provide on your articles. I will bookmark your blog and test once more here frequently. I’m moderately certain I will learn many new stuff right here! Best of luck for the next! eddgedaeeefaeaad

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here