Prithvi Theatre , Mumbai

Prithvi Theatre………………मुम्बई का एक शानदार, जाना माना auditorium है जो 99% हिंदी भाषा के रंगमंच, रंगकर्मी और नाट्य कला प्रस्तुतियों के लिए समर्पित एक संगम स्थल हैं जहां एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों का कुम्भ मेला लगता हैं जिसे देखने के लिए मुम्बई और देश के अलावा विदेशों से भी कई कला प्रेमी पृथ्वी थिएटर आते है, दूसरे अर्थ में यदि पृथ्वी थिएटर को थिएटर का मंदिर ( TEMPLE OF THEATRE ) की संज्ञा दी जाए तो ऐसा कहना बिल्कुल गलत नही होगा।

पृथ्वी थिएटर की स्थापना वर्ष 1942 में श्री. पृथ्वीराज कपूर जी ने की थी जब पारसी और अंग्रेजी थिअटर का जबरदस्त चलन था। पृथ्वी थिएटर में श्री पृथ्वी राज कपूर ने शकुंतला नाटक से नाट्य यात्रा का सफर शुरू किया जो आज तक अविरल रूप से लाखों नाट्य प्रस्तुतियों का ऐतिहासिक विरासत बनता जा रहा हैं। श्री पृथ्वीराज कपूर ने अपने प्रथम नाटक शकुंतला से मुम्बई में हिंदी नाट्य संसार का जो बीजारोपण किया था उसका विशाल वट वृक्ष रूपी हिंदी रंगमंच क्षेत्र से पूरी दुनिया परिचित हैं।
सबसे सराहनीय बात ये है कि एक के बाद नाट्य प्रस्तुति करते हुए कुछ ही सालों में श्री पृथ्वीराज कपूर जी ने 2662 नाटको का सफल प्रदर्शन किया, जैसे कि- दीवार, पठान, ग़द्दार, कलाकार, पैसा, किसान। जैसे कई नाटकों को बहुत बड़ी अपार सफलता मिली। सच कहा जाए तो हिंदी नाट्य मंच को एक विशाल अंतरिक्ष रूपी प्लेटफॉर्म देने में पृथ्वी थिएटर का बहुत बड़ा योगदान हैं। दूसरे अर्थों में पृथ्वी थिएटर एवं हिंदी रंगमंच एक दूसरे के प्रति पूरक हैं। एक दूसरे के बिना आधे अधूरे बिखरे बिखरे से हैं।

श्री पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिअटर में होने वाले नाटकों के बहुत से अभिनेताओं को एक अलग पहचान मिली और उस पहचान से बॉलीवुड में फिल्मे मिली और उसमे से अधिकांशतः कलाकारों की सफलता एवं उनके अभिनय छाप के कारण फिल्मी दुनिया के बहुत से दूसरे नए कलाकारों को प्रेरणा मिली। इसीलिए पूरी फिल्म इंडस्ट्री पृथ्वी थिएटर के उत्कृष्ट योगदान के लिए श्री पृथ्वीराज कपूर जी को सराहती हैं।

श्री पृथ्वीराज कपुर जी ने अपने सुपुत्र सफल फिल्म अभिनेता श्री शशी कपूर को उस काबिल बनाया की वे पृथ्वी थिएटर के डायरेक्टर की भूमिका निभा सके और उन्होंने पूरी जिंदगी पृथ्वी थिएटर के लाजवाब संचालन एवं मार्गदर्शन में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। श्री शशी कपूर जी ने उनके थिएटर की मुख्य कलाकार जेनिफर केंडल को अपना जीवन साथी चुना एवं शादी के बाद दोनों ने पृथ्वी थिएटर के परचम को ऊंचा लहराने के लिए खूब मेहनत की और उन दोनों की यह मेहनत जबर्दस्त रंग लाई लेकिन……..

श्री पृथ्वीराज कपूर जी चाहते थे कि उनके पास खुद का स्थायी रूप की जगह हो, जहां पर थिएटर हो सके। 1962 में पृथ्वीराज कपूर जी ने थिएटर स्पेस के लिए जुहू में एक जगह देखा। दुर्भाग्यवश खराब तबियत के कारण ये नही हो पाया, और 1972 में उनकी मृत्यु के बाद ये सपना सच होने को दिख रहा था। उसी वर्ष उस जगह को शशी कपूर जी और उनकी धर्मपत्नी जेनिफर केंडल ने निर्णय लिया कि वे पृथ्वीराज कपूर जी के सपने को साकार कर सकते है,ये जगह लेने के बाद उन्होंने उसका नाम श्री पृथ्वीराज कपूर मेमरिअल ट्रस्ट एंड रिसर्च फाउंडेशन रखा गया, यह सोचकर की इससे भारतीय नाट्य और हिंदी थिएटर का नाम उच्चा हो सकता है।

पृथ्वी थिएटर का विमोचन 5 नवंबर 1978 में हुआ। और पहला नाटक था उध्वस्था धर्मशाला जिसके लेखके थे जी.पी.देशपांडे और इसके कलाकार थे नसीरुद्दीन शाह , ओम पुरी , बेंजामिन गिलानी । उस समय बहुत से गुजराती और मराठी थिएटर होते थे, लेकिन पृथ्वी थिएटर को हिंदी थिएटर का गढ़ कहा जाने लगा। एक ऐसा थिएटर जहाँ नए कलाकारों को, नए लेखकों को, नए निर्देशको को, अपना योग्यता दिखाने का पूरा का पूरा भरपूर मौका मिलता हैं।

वर्ष 1983 में पृथ्वी थिएटर ने अपना पांचवा सालगिरह मनाया, जहा पर एक से बढ़ कर एक नाटक हुए, और ऑडियंस के साथ ही साथ क्रिटिकस द्वारा बहुत सराहना मिली। उसी वर्ष पृथ्वी थिएटर के साथ पृथ्वी कैफ़े भी जुड़ गया, जो कि नए कलाकार और नाट्य प्रेमियों के मिलने जुलने की जगह बन गयी। एक नाट्य अड्डा कहना ज्यादा उचित होगा जहां चाय की चुस्कियों के साथ कई घण्टे बैठकर कई मुद्दों पर कई लोग बेरोक टोक विचार, विमर्श और तार्किक बहस कर सकते हैं।

वर्ष 1984 में जेनिफर कपूर जी की मृत्यु हो गयी, और फैसला हुआ कि उनके मृत्यु के दिन भी पृथ्वी थिएटर बन्द नही रहेगा, और उस दिन भी शो चलता रहा। उनकी मृत्यु के बाद उनके बड़े बेटे कुणाल कपूर ने पृथ्वी थिएटर को चलाने का जिम्मा ले लिया। 1990 में श्री शशी कपूर की बेटी संजना कपूर ने भी भाई की मदद करने के लिए पृथ्वी थिएटर से जूड गयी। संजना कपूर ने पृथ्वी थिएटर में बहुत से नए-नए वर्कशॉप्स लाये, बच्चो के लिए भी वर्कशॉप् की एक नही परम्परा का श्री गणेश किया।

पृथ्वी थिएटर में आज भी नए कलाकारों, लेखकों के लिए योग्यता दिखाने का मौका मिलता है। पृथ्वी थिएटर में सालभर में लगभग 540 नाटक, और वह भी हिंदी भाषा मे होते है जिन्हें देखने के लिए हिंदी दर्शकों के साथ अन्य भाषा के दर्शकों का हुजूम उमड़ पड़ता हैं।

यदि कोई रँगप्रेमी, नाट्यकर्मी या नवकलाकर पृथ्वी थिएटर से जुड़ना चाहता है , तो उसे जाकर पृथ्वी थिएटर में कम से कम दस नाटक जरूर देखना चाहिए।

PRITHVI THEATRE
Near Juhu Church,
Juhu JVPD Bus Depot, Villey Parle ( W )
Mumbai 

Contact No. :- +91 (22) 26149546

Email: [email protected]

अधिक जानकारी के लिए आप पृथ्वी थिएटर के वेबसाइट पर जा सकते है।

www.prithvitheatre.org

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