Struggler (उपन्यास) 12 : इंसान

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Struggler novel

दुनिया मे सबसे बदजात प्राणी की नस्ल इंसान की है जिसे सामाजिक प्राणी कहा जाता हैं। इंसान से ज्यादा कमीना, हरामखोर, खुदगर्ज और कोई जीव हो ही नहीं सकता । ईश्वर का शुक्र मनाए की इंसान आदमखोर नहीं हैं लेकिन उसकी मनोवृत्ति इस आदमखोर प्रवृत्ति से ज्यादा खतरनाक हैं। मनुष्य मनुष्य का मांस भक्षण नहीं करता इसलिये वह मन, वचन और कर्म द्वारा अपनी निकृष्टता का प्रदर्शन करके असीम तृप्ति का अनुभव करता हैं। मुट्ठी भर सुख पाते ही महा अभिमानी और क्षण भर का दुख भोगने पर ईश्वर के समक्ष भीरू बनकर अपना उल्लू सीधा करने की फिराक में रहनेवाला जीव एड्स के वायरस से भी ज्यादा खतरनाक होता हैं। मैं यहां साफ करता चलूं की ऐसी मनोवृत्तियों से बहुत दूर होता है स्ट्रगलर।।। जो अपनी किस्मत की नाकामियों के वायरस का ही शिकार हो चुका हो वो भला आदमखोर कैसे बन सकता हैं। मेरे कहने का मतलब एक स्ट्रगलर के अंदर कमीनापन, हरामीपन और खुदगर्जी पास नहीं फटकती क्योंकि वो कला के करीब होता हैं।

लेकिन बेबस, लाचार स्ट्रगलर कभी कभी अपने आप से यह सवाल पूछता है कि, ” क्या सभी की उम्मीदें पूरी होती हैं ? क्या सपनें सच भी होते हैं ?”

जीवन की बिसात पर खड़े कर्म और भाग्य की मोहरें न जाने कब किसका पासा पलटकर उसे ताज़ और तख़्त का रुतबा प्रदान करें, और न जाने कब चारों खाने चित्त करके मैदान छोड़ने के लिए मजबूर कर दे।।। भविष्य के गर्भ में पलनेवाली होनी-अनहोनी को आज तक कोई भांप नहीं पाया हैं, जानना तो बिल्कुल असम्भव हैं। यह कैसी विडंबना है कि बदी के बदा को कोई बदल नहीं सकता । लेकिन एक स्ट्रगलर चाहे तो वो विधि के इस विधान को उलट पुलट कर रख सकता है क्यों कि दुनिया का सबसे कठिन काम एक सफल एक्टर बनना है और दुनिया का सबसे कठिन काम करने वाले को स्त्रगलर को इतनी छूट तो ईश्वर देता है कि यदि वो चाहे तो अपनी पहाड़तोड़ मेहनत से वो अपनी किस्मत में सुर्खाब के  पर लगा सकता है, वो अपनी जिंदगी के दिन में दो सूरज और रात को चार चांद भी लगा सकता हैं बशर्ते वो किसी लालच या शॉर्टकट के भंवर में न फसे तो…………..

*************************एक एक्टर बनना भाग्य की बात है और एक सफल एक्टर बनना परम सौभाग्य की बात है ।
अपने करैक्टर को परिपूर्णता के साथ जीना ही एक्टिंग होती हैं।
जो एक्टर अपने सपनो में कुछ और मिलावट करता है वो खोटा होता है ।
खोटा एक्टर ज्यादा दिन तक अपने को धोखे में रखकर  टिक नहीं सकता हैं।
हम छोटी छोटी ईट जोड़कर ही लम्बी ऊंची दीवार खड़ी कर सकते हैं……
जिसने इस बात को समझा वो सफल,
जिसने जानबूझकर भी नही समझा वो असफल,
क्योंकि दुनिया का सबसे कठिन काम है एक सफल एक्टर बनना,
वो भी बॉलीवुड में।।।

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Struggler (उपन्यास) 11 – Dream city

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Struggler (उपन्यास) 13 : सुख – दुःख

 

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