Struggler (उपन्यास) 19 : struggle of strugglers

0
137

स्ट्रगलर और उसका स्ट्रगल…मन में एक आस है कि कभी न कभी अपनी बात भी कही न कही तो बनेगी जैसे दिलीप कुमार, देवानंद, सुनील दत्त, मनोज कुमार, धर्मेंद्र, शत्रुघ्न सिन्हा, विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन ,मिथुन चक्रवर्ती, गोविंदा, शाहरुख खान, राजपाल यादव, विजय राज, इरफान खान, नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ऐसे कई लोग हैं…….जिन्होंने बड़े कड़े स्ट्रगल के बाद अपनी मंजिल पाने में आखिर सफल हो ही गए। मनोज वाजपेयी ने नौ साल बाद तो नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी को बॉलीवुड स्टारडम में अपनी पहचान बनाने में बारह साल लग गये।

जो बॉलीवुड में सफल हो गए वो मुक्कदर के सिकन्दर हो गए लेकिन सबके मुकद्दर में सिकंदर बनना नही लिखा होता। स्पॉट बॉय से निर्देशक बने प्रकाश मेहरा,लॉरेंस डिसूजा जैसे नामी निर्देशक ने कभी सपने में भी नही सोचा था कि एक दिन वे इस फिल्मी दुनिया मे अपना इतिहास लिखेंगे। स्ट्रगल तो हर किसी को करना पड़ता है। कुछ लोग भरे पेट संघर्ष करते है तो कुछ लोग खाली पेट । लेकिन एक बात तो पक्की है कि स्ट्रगल के दिनों में बहुत पापड़ बेलने पड़ते है।

भयंकर पीड़ा भोगनी पड़ती है। सामाजिक उपहास को झेलना पड़ता है। एक बार जो यहाँ आ गया वह वापस नही लौट पाता। यदि वापस लौटा भी तो वह किसी काम का आदमी नही रह जाता। फिल्मी दुनिया मे असफलता का कड़वा घूंट पीकर लौटा स्ट्रगलर और सीमा पर पीठ पर गोलियां खाकर भाग आया सैनिक ,इन दोनों की समाज मे कोई इज्जत नही होती। स्ट्रगलर हो या सैनिक ,अगर अपना लक्ष्य तय कर लिया तो आपकी जयजयकार …असफल हो गए तो आपके जीवन को धिक्कार…इसलिए स्ट्रगलर और सोल्जर को विजय प्राप्ति के लिए घनघोर लड़ाई लड़नी ही पड़ती हैं। बीच लड़ाई में मैदान छोड़कर भागने वाले भगोडे सैनिक और फ्रुस्टेड स्ट्रगलर का जीवन पेड़ के उस ठूठे लकड़ी की तरह होता है जिस पर न तो कपोले अंकुरित होते है और न ही जलाने के काम आता है। इसलिए बहुत सोच समझकर फौज और फिल्म में भर्ती होने का निर्णय लेना चाहिए।

 

जो लोग बिना सोचे समझे, बिना किसी रणनीति के, सिर्फ ख्याली पुलाव बनाकर हवा हवाई में एक कदम आगे बढाते है तो समझ लीजिए कि उनका दूसरा कदम दलदल में ही पड़ने वाला है।
दलदल में पड़े कदम तो जिंदगी झंड हो जाती हैं और झंड जिंदगी की बड़ी दुख भरी कहानी होती हैं जिसके दर्द को कोई और न समझता है, न समझने की कोशिश ही करता हैं!!! दुख कॉमन है!
दुख के कारण हजार!! सबका अपना अपना दुख है। क्यों है ?
कब है ? क्या उपचार है ? नाना प्रकार के उत्तर आपको दुखियो के मुख से सुनने को मिलेंगे। किसी की शादी नही हो रही है तो वह दुखी है। किसी कि शादी हो गई और चरित्रहीन दुष्टा स्त्री मिल गयी तो वह दुखी है। सब कुछ बराबर है तो दहेज में हुई फरेबी के कारण वह दुखी है। कही सास बहू से तो कही बहु अपने सास से दुखी है। कोई पुत्रहीन हो तो दुखी है। किसी को मानसिक विकलांग पुत्र की प्राप्ति हुई है तो दुखी है। किसी को पुत्र देकर काल ने उससे छीन लिया तो वह दुखी है।

 

कमाई धमाई ठीक नही है तो दुखी है। जिनके पास अकूत धन है तो सरकार की निगाह से बचाये रखने में परेशान है, और यही परेशानी उसके दुख का कारण है। कोई दिल के बीमारी से दुखी है तो कोई भरी जवानी में सिर के काले बालो के अंधाधुंध झड़ने से दुखी है।
चना है लेकिन दाँत न होने के कारण दुखी है, तो कोई दाँत है लेकिन सड़ने और पायरिया के दर्द से दुखी है। मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ है और उनकी प्रार्थना याचना सुन-सुन कर भगवान दुखी है तो सत्यनारायण की महापूजा सुनाने के बाद यजमान से पर्याप्त दान -दक्षिणा न मिलने पर पंडित जी दुःखी है।  कोई शराब के लिए मोहताज है तो कोई शराब में सब कुछ डुबाकर दुखी है।
दुख का अस्तित्व वायु की तरह है जो सर्वत्र व्याप्त है।
हवा को न किसी ने देखा ,न स्पर्श किया हम केवल महसूस करते है। ठीक उसी तरह दुख को हम केवल महसूस करते है ।
स्ट्रगलर भी केवल दुख को महसूस करता हैं। वो अपना दुख किसी को कह नहीं पाता क्यों कि कोई उसका दुख या उसके दुख के कारण को समझ नहीं सकता। एक स्ट्रगलर के दुख का कारण समाज के लिए बेमानी हैं क्यों कि स्ट्रगलर्स को अक्सर उड़ता हुआ तीर लेने की उलाहना मिलती रहती हैं। ” मेरा दरद न जाने कोय ” गाता गाता बिचारा स्ट्रगलर घाट घाट घूमता रहता है क्योंकि उसे पता है कि उसके दुख दर्द की सही दवा क्या है ? सही इलाज क्या हैं ?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here