Struggler (उपन्यास) 2 : जीवन एक संघर्ष

जीवन के सार्थकता की खोज में यदि कोई एक बार उलझा तो समझो कि उसके लिए……जीवन एक संघर्ष हैं। उद्देश्यपूर्ण सार्थक जिंदगी जीने के लिए मनुष्य के सामने एक निश्चित लक्ष्य होना चाहिए। एक स्वप्न होना चाहिए। ” कुछ विशेष ” कर दिखाने की हूक, भीड़ में ” अपनी एक अलग पहचान ” बनाने की ललक उसे दिन रात बेचैन किये रहती हैं। लेकिन….किसी भी महान लक्ष्य को प्राप्त करना बच्चों का खेल नहीं हैं। सफलता कोई चमत्कार नहीं जो पलक झपकते ही सिद्ध हो जाएगी। फिर भी, मनुष्य की जिंदगी में लक्ष्य का होना उतना ही आवश्यक है जितना आकर्षक, कर्णप्रिय सुगम संगीत में लय, ताल,आरोह और अवरोह की आवश्यकता होती हैं।

यदि हाथी बिना सूंड का हो, नागराज के पास जहर न हो, विशाल सागर में लहरों के उफान न हो, अग्नि में तपिश न हो, ………….तो क्या होगा ????

Target
लक्ष्य

इसी प्रकार यदि मनुष्य के जीवन मे लक्ष्य न हो……….तो क्या होगा ???? बिना लक्ष्य के किसी मनुष्य का जीवन बिल्कुल बेकार होता हैं। धिक्कार है ऐसे जिंदगी पर !!!!

शिखर के जीवन का भी एक ” लक्ष्य ” है…..नाम, पैसा, शोहरत और इसके लिए जरूरी है अभिनय के शिखर पर अपनी सफलता का परचम लहराना। मुंबई की फिल्म नगरी बॉलीवुड में अपने आपको एक बेहतर ” अभिनेता ” साबित करना। संघर्ष जारी हैं।

               STRUGGLE IS ON

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Struggler (उपन्यास) 3 : मायानगरी मुंबई

Struggler (उपन्यास) 4 : compromise

 

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