Struggler (उपन्यास) 21 : 99% failure 1% success

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मुम्बईया बॉलीवुड फिल्म नगरी में एक दो नहीं, लाखों स्ट्रगलर सड़क की खाक छान रहे है। कुछ मुम्बई के मूल निवासी है तो अधिकतर स्ट्रगलर उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार,पंजाब,हरियाणा, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और नेपाल से भी आते है। मुम्बई में सबसे बड़ी तकलीफ रहने की हैं। झुग्गी-झोपड़ी,खोली-चाल, वन रूम किचन-वन बी एच के में लोग बहुत बड़ी रकम किराए के रूप में देने कर लिए मजबूर हैं अलबत्ता अगर रहने का जुगाड़ हो गुण तो…वैसे रहने की व्यवस्था लोग अब मुम्बई के बाहर करने लगे है जहां किराए के मकान मुम्बई की तुलना में थोड़ा बहुत सस्ते में है लेकिन आने जाने में कम से कम तीन से छह घण्टे यात्रा में ही लग जाते हैं।

खैर…रहने,खाने-पीने की तकलीफ के साथ आर्थिक संकट झेलते हुए एक अच्छे मौके की तलाश में एक कलाकार जी जान से अपने को कामयाब बनाने के लिए संघर्षरत रहता है। प्रत्येक स्ट्रगलर सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को अपना भगवान समझता है। उनके स्ट्रगल के दिनों की कहानी से प्रेरणा लेकर एक न एक दिन कुछ बनकर दिखाने की तमन्ना के साथ दिन रात अपने आपको कड़े संघर्ष से लड़ने के लिए मुस्तैद करता रहता है। यहाँ ऐसा कोई नियम नही है कि फलां फलां समय तक संघर्ष करने के पश्चात आप सफल हो ही जायेंगे। कहने का मतलब साफ साफ यह भी है कि इस इंडस्ट्री में निन्यानबे प्रतिशत (९९%) संभावना असफलता की है और एक प्रतिशत (१%) संभावना सफलता की। यहां मेरा मन्तव्य किसी को नकारात्मक सोच की दिशा में प्रेरित करना नहीं है बल्कि सच्चाई की धरातल पर दौड़ने के पहले मानसिक रूप से मजबूत करना हैं। सफलता असफलता कि तराजू में भाग्य के महत्व को बिल्कुल नकारा नही जा सकता हैं। यहाँ जो जीता वही सिकंदर। जो फिट वो हिट बाकी सब फ्लॉप।मुम्बई महानगरी की फिल्मी जादुई नगरी की अपनी एक अलग चमक है, अपना अनोखा इतिहास है जिसकी चकाचौंध से आकर्षिक होकर हजारों लाखों फिल्मी दीवाने परवाने इस ओर खींचे चले आते है। यहां सफलता मिलना इतना आसान नहैं है लेकिन एक बार सफल हो गए तो आपको इतना मान-सम्मान ,यश और धन की प्राप्ति होगी जिसकी आपने कभी सपने में भी कल्पना नही की होगी।

जीवन का दूसरा नाम संघर्ष है और फिल्मी दुनिया का संघर्ष सभी के बस की बात नही है। केवल जीवट व्यक्ति ही इस संघर्ष में टिक सकता है , बाकी ऐरे गैरे नत्थू खैरे कुछ ही महीना,
कुछ वर्ष में अपनी हैसियत से हारकर अपनी क्षमता को समझकर इस लाइन से दूर हो जाने में ही समझदारी का काम करते हैं लेकिन जो एक बार इस समझदारी को समझने से चूक जाता हैं फिर तो समझो ईश्वर ही उसका माई बाप हैं।  स्ट्रगलरों के बारे में अगर विस्तार से कहानी लिखी जाये तो एक क्या, अनगिनत स्ट्रगलर महापुराण तैयार हो सकता है। लाखों स्ट्रगलरो की राम कहानी एक जैसी नहैं है…. सभी के जीवन में हजारों रंग है… अनेको मोड़ है… भिन्न भिन्न सिद्धान्त और आदर्श है….लेकिन सबके सपने एक है….मंजिल एक हैं…जीवन का उद्देश्य एक है….. लक्ष्य एक है…..

ठहरा हुआ पल,
आज नहीं तो कल……

फिर चल पड़ेगा.
सपनों के उफान पर……

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